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नकारात्मकता से सकारकमकता की ऒर - From Negativity to Positivity


आज सुबह किसी काम से पंचांग खोला तो सामने लिखा था यात्रा के दौरान शुभ एवं अशुभ शकुन वैसे में इन बातों पर विश्वास नहीं करता पर फिर भी सोचा थोड़ा पढ़ लूँ की आखिर है क्या इसमें? आगे पढ़ा तो शुभ और अशुभ फल कुछ इस प्रकार थे !

यात्रा के शुभ शकुन - पुत्रवान मनुष्य, सौभाग्यवती स्त्री, समृद्ध यशस्वी व्यक्ति, प्रियजन, सुन्दर वेशधारी स्त्रीपुरुष , चरित्रवान व्यक्ति  प्रसन्न मुख व्यक्ति, अधिकारी, शिक्षक,  कुल पुरोहित , धुएं रहित अग्नि, रूदन रहित शव यात्रा , पीछे से जाता खाली बर्तन, अच्छे वचन , देव - प्रतिमा , किसी की उन्नति या भलाई का समाचार, जयघोष, वेद - मन्त्रों का उच्चारण. 

यात्रा के अशुभ शकुन- गमन करता हुआ रोगी, विकलांग व्यक्ति , जटाधारी, क्रोधी, मल मूत्र करता हुआ व्यक्ति, शराबी, मानसिक बिछिप्त, भ्रष्टाचारी व्यक्ति, भिखारी, मांस आदि का व्यापार करने वाला, कंटीली झाड़ियां, सुंगंध रहित फूलखाली बर्तन, टूटे फूटे बर्तन, कलह, कोई अशुभ समाचार अदि !


वैसे तो पंचांग में बहुत सारे शुभ-अशुभ शकुन लिखे थे पर मैंने कुछ महत्वपूर्ण उठा लिए ! अगर आप इन शकुन को ध्यान से पढ़ें तो मुझे नहीं लगता की आज की दुनिया कोई शुभ शकुन हमको मिल पायेगा ! मैं बाकी  देशों की स्थिति तो नहीं बता सकता लेकिन अपने देश के छोटे शहरों की स्थिति बहुत ही भयानक बन चुकी है

अगर हम शुभ और अशुभ शकुन को आसान भाषा में समझें तो ये नकारात्मकता और सकारात्मकता का ही दूसरा रूप है ! यदि हम शुभ अशुभ कि लफड़े में पड़के बस अपने घरगांव और देश का माहौल सकारात्मक बनायें तो यकीं मानिये सब शुभ शगुन ही होंगे ! नकारात्मक भावना एक ऐसे दीमक की तरह है जो व्यक्ति क़े व्यक्तित्व को ख़त्म कर देता है और वो व्यक्ति भगवान् में भी कमी ढूढ़ने लगता है. वहीँ सकारात्मकता एक ऐसे वरदान की तरह है जो किसी भी व्यक्ति की अचे गुणों को सामने लाने में मदद करती है !

आज कल कई लोग स्ट्रेस मैनेजमेंट क़े बारे में अध्यन कर रहे हैं जहां तक मुझे लगता स्ट्रेस का एक मात्र कारण या तो अपनी नकारत्मकता है या दूसरों की !

यदि हम एक श्वस्थ, शांत और ज़िंदगी जीना चाहते हैं तो हमको अपने अंदर सकारात्मक भावनाएं उत्पन्न करनी ही पड़ेंगी ! फिर देखिये जीवन में कोई भी स्ट्रेस नहीं होगा कोई चिंता होगी

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