आप सब लोग जानते ही हैं की हमारा उत्तराखंड कितना शांत और सुन्दर प्रदेश है, इसकी सुंदरता ऐसे ही बनी रहे यही ईश्वर से कामना है !
खबर ये है की हमारे यहाँ चुनाव आने वाले हैं तो जाहिर है की राजनीतिक माहौल बहुत गरमाया हुआ है, मानसून सत्र चल रहा है, पक्ष विपक्ष में भारी बहस जारी है, अलग अलग मुद्दों पे बात हो रही है पूरी चर्चा अपने जोरों पर है, जैसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कोविड 19 टीकाकरण, आदि बहुत सारे मुद्दे है,
इनमे से मुझे जो लगा की विशेष मुद्दा है वो है भू- कानून क्योंकि इसको किसी राजनीतिक दाल ने नहीं बल्कि जनता ने उठाया है, जनता को
लगा की आज से 50 -60 जब सारे शहर के लोग उत्तराखंड में बस जाएंगे तो क्या होगा ? कहीं ऐसा न हो की अभी हम चंद पैसों के खातिर अपने पुरखों की जमीन तो बेच दें और "बाद में न घर के रहें न घाट के" में अक्सर देहरादून और अनन्य जगह में देखता हूँ की बहरी प्रदेशों के लोगों द्वारा जमीन खरीद दी गई है और उन पर गेस्ट हाउस, होम स्टे, वेडिंग पॉइंट, रेस्टोरेंट, पिकनिक स्पॉट आदि खोल दिए गए हैं, में यह नहीं बोल रहा की की ये सब गलत है पर एक पहाड़ी की नजर कुछ और ही देख रही है, यह मुद्दा अब इतना बड़ा हो गया की सरकार को इस पर कुछ निर्णय लेना ही पड़ेगा,


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